Tuesday, December 11, 2018

علماء يطورون تكنولوجيا لقاحات قابلة للتعديل لمكافحة الأوبئة

يعتزم تحالف عالمي يهدف إلى مكافحة الأوبئة استثمار ما يصل إلى 8.4 مليون دولار لتطوير تكنولوجيا لإنتاج لقاحات صناعية قابلة للتعديل لتناسب كل مرض على حدة بما يسمح بمكافحة العديد من البكتيريا والفيروسات مثل الإنفلونزا والإيبولا وداء الكلب «السعار».

ويهدف الاتفاق بين «تحالف ابتكارات الاستعداد للأوبئة» وفريق من العلماء من «إمبريال كوليدج» في العاصمة البريطانية لندن إلى تطوير «منصة لقاحات» تستخدم تقنية تمكن الحمض النووي الريبوزي، الذي يمثل الجينوم في سلالة من الفيروسات ويسمح لها بالاستنساخ والتكاثر، من تعزيز قدراته وتعرف هذه التقنية اختصارا باسم «إس.إيه-آر.إن.إيه».

ويستخدم نظام «منصة اللقاحات» ذات المكونات الأساسية ثم يمكن تعديله للتحصين من أمراض مختلفة من خلال إضافة تسلسل جيني جديد من المرض المستهدف الوقاية منه.

وقال روبن شاتوك الذي يقود فريق إمبريال الذي يطور النظام الذي أطلق عليه اسم (رابيدفاك) «يمكن أن يشكل نقلة ضخمة. قد يغير الطريقة التي ننظر بها إلى كيفية صنع التطعيمات».

وأضاف أنه ما زالت هناك حاجة لسنوات عديدة من البحث والاختبار لكنه يأمل في أن تؤدي تلك التكنولوجيا في يوم من الأيام لإنتاج تطعيمات تؤخذ مرة واحدة فقط للوقاية من وباء واحد أو إنتاج خليط من اللقاحات التي تحصن من عدة أمراض معدية مختلفة في آن واحد.

والفكرة وراء تقنية «إس.إيه-آر.إن.إيه» هي محاكاة الطريقة التي تعمل بها خلايا الجسم لصنع مصل مضاد لمقاومة الأمراض، بما يعني إدخال جسم غريب يحفز رد فعل مناعي بدلا من حقن الجسم بالمصل ذاته بشكل مباشر. وقال شاتوك في مقابلة عبر الهاتف: «الميزة الأخرى هي أن الإنتاج في هذه الحالة سيكون سريعا جدا لأن العملية برمتها صناعية».

وظهور وباء مثل ما حدث مع الإيبولا في أفريقيا أو زيكا الذي انطلق من البرازيل هو أمر يحدث على فترات ولا يمكن التنبؤ به ويتطور الوضع فيه بسرعة شديدة، وفي المقابل يستغرق تطوير لقاح للتحصين من مثل تلك الأمراض في الوقت الراهن ما يصل إلى عشر سنوات أو أكثر.

وتشكل «تحالف ابتكارات الاستعداد للأوبئة» في بداية 2017 بهدف إسراع وتيرة تطوير التطعيمات بشكل جذري خاصة ضد أمراض جديدة لم يسبق التعامل معها. ويأمل التحالف وفريق العلماء في البدء في إجراء تجارب على الحيوانات في المعمل في أوائل العام المقبل ثم التحول لتجارب سريرية مبكرة على البشر خلال عامين.

Wednesday, November 28, 2018

की तस्वीर लीक, इसमें हो सकते हैं दो डिस्प्ले और तीन कैमरे

चीनी स्मार्टफोन निर्माता कंपनी ने इसी साल वीवो नेक्स स्मार्टफोन पेश किया था और अब वीवो नेक्स2 की नई तस्वीर सामने आई हैं। फुल-स्क्रीन डिस्प्ले और पॉप-अप सेल्फी कैमरा होने की वजह से वीवो नेक्स काफी चर्चा में रहा था। अब हाल ही में   2 की कुछ तस्वीरें लीक हो गई हैं। ऐसा प्रतीत हो रहा है कि ZTE के सब ब्रांड नूबिया ने जिस तरह Nubia X में सेकंड डिस्प्ले का इस्तेमाल किया।
ठीक उसी तरह से वीवो नेक्स 2 में भी दूसरा दो डिस्प्ले का समावेश दिया जाएगा। वीवो नेक्स 2 की तस्वीरें चीनी वेबसाइट वीबो पर लीक हो गई हैं। तस्वीरों में फोन का बैक और फ्रंट पैनल नजर आ रहा है। फ्रंट पैनल पर बिना नॉच वाला बेजल-लेस डिस्प्ले दिखाई दे रहा है। वहीं फोन के बैक पैनल पर तीन रियर कैमरे और सेकेंडरी डिस्प्ले होगी। Vivo Nex 2 मजबूत एवं भरोसेमंद डिवाइस साबित होगा या नहीं, अभी इस बात पर कुछ भी कह पाना संभव नहीं। देखने वाली बात यह भी होगी कि क्या ये प्रोटोटाइप डिवाइस है या फिर Vivo एक कदम आगे बढ़ते हुए कुछ नया करने जी रही है।
Vivo Nex 2 का डिजाइन काफी हद तक Nubia X से मिलता जुलता होगा। याद करा दें कि नूबिया एक्स को पिछले महीने चीन में लॉन्च किया गया था। चीनी मार्केट में Nubia X के 6 जीबी रैम/ 64 जीबी स्टोरेज वेरिएंट को चीनी मार्केट में 3,299 चीनी युआन (करीब 35,000 रुपये) है। इस कीमत में गोल्ड के साथ ब्लैक व ग्रे कलर मॉडल मिलेगा। ब्लू मॉडल की कीमत 3399 चीनी युआन (करीब 36,000 रुपये) है।
वेज कोल्हापुरी एक मराठी व्यंजन है जिसमें कई सब्जियों को एक तीखी और मसालेदार नारियल आधारित ग्रेवी में पकाया जाता है। यह महाराष्ट्र में ही नहीं पूरे उत्तर भारत में बहुत प्रसिद्ध है। आइए जानते हैं कैसे बनाते हैं वेज कोल्हापुरी
सामग्री
गाजर- 1
आलू - 1
शिमला मिर्च - 1
फूल गोभी - 1 कप
टमाटर - 3
अदरक - एक छोटा तुकड़ा
मटर - ¼ कप
क्रीम - ½ कप
सूखा नारियल - ¼ कप कद्दूकस किया हु
तेल - आवश्यकता अनुसार
हरा धनिया - थोड़ा कटा हुआ
हींग - 1 पिंच
जीरा -½ छोटी चम्मच
हल्दी पाउडर - ¼ छोटी चम्मच
लाल मिर्च पाउडर - ½ छोटी चम्मच
धनिया पाउडर - 1 छोटी चम्मच
गरम मसाला - ¼ छोटी चम्मच
लाल मिर्च साबुत - 2
तिल - 1 टेबल स्पून
नमक - स्वादानुसार
सब्जियों को धोकर, छोटा-छोटा काट लीजिए। टमाटर, हरी मिर्च और अदरक को मिक्सी में पीस कर पेस्ट बना लीजिए। कढ़ाई में तेल डाल कर गरम कीजिए इसमें आलू डालिए और ब्राउन होने तक तल कर निकाल लीजिए। गोभी, गाजर और शिमला मिर्च बारी-बारी से हल्का ब्राउन होने तक तल लीजिए और एक बरतन में निकाल लें। अब एक दूसरी कढा़ई में तिल और जीरा डालकर हल्का सा भूनें अब इसमें कद्दूकस हुआ नारियल भी डाल दीजिए और हल्का सा कलर चेंज होने तक भून लीजिए। मसाले को निकाल लें और ठंडा होने के बाद इसे पीस लीजिए।

Thursday, November 8, 2018

لا يزال ما وقع داخل القنصلية السعودية في اسطنبول غامضا

وأضاف المصدر ذاته، الذي تحدث إلى بي بي سي عربي عبر بريد إلكتروني مشفّر: "لقد صبوا عليه الماء، لكنه لم يستفق من غيبوبته".
كما توجد شهادة أخرى تدعم رواية الاعتداء على اللواء الذي أدى إلى وفاته في مكان احتجازه.
ويقول مسؤولون سعوديون إن التحقيقات التي شهدها فندق ريتز كارلتون حضرها أحد أبرز المساعدين لولي العهد، وقد خفضت رتبته في أعقاب مقتل جمال خاشقجي.
لكن السلطات السعودية تنفي وقوع أي حالات تعذيب أو اعتداء في فندق ريتز كارلتون، وقالت لبي بي سي عربي: "نرفض رفضًا قاطعًا (تلك) الادعاءات الواردة منكم... العارية من الصحة تماما".
وتابعت مؤكدة أن "لجنة مكافحة الفساد، التي أنشئت بموجب مرسوم ملكي، تواصل أعمالها بطريقة مسؤولة ووفق الأنظمة المعمول بها في المملكة، كما أن قانون الإجراءات الجزائية يضمن حقوق المدعى عليهم، ويمنع تعرض المحتجز لأي ضرر".
وفي ما يتعلق بقضية مقتل جمال خاشقجي، قالت السلطات السعودية إن تحقيقها في مقتل الصحفي سيكون "تحقيقا كاملا وشفافا. ويعمل المسؤولون السعوديون المعنيون مع نظرائهم الأتراك لكشف الحقائق."
وأضافت أن "هناك جريمة ارتكبتها مجموعة وهي قيد التحقيق حاليا، وستضع المملكة آليات لضمان عدم تكرار مثل هذا الحادث المؤسف."
كما أشارت إلى أن "هناك لجنة، برئاسة ولي العهد، لإعادة هيكلة رئاسة الاستخبارات العامة"
علق البيت الأبيض اعتماد كبير مراسلي قناة سي أن أن، جيم أكوستا، بعد ساعات من سجال حاد وقع بينه وبين الرئيس الأمريكي، دونالد ترامب.
وخلال السجال، حاولت موظفة في البيت الأبيض نزع الميكروفون من يد أكوستا خلال مؤتمر صحفي الأربعاء.
لكن المتحدثة باسم البيت الأبيض، سارة ساندرز، قالت إن الاعتماد علق لأن أكوستا وضع يده على امرأة.
ووصف أكوستا تصريح ساندرز بأنه "كاذب".
وقال ترامب في المؤتمر الصحفي عن مراسل سي أن أن إنه "شخص بغيض وفظ".
وتدخلت موظفة وحاولت نزع الميكروفون من يد أكوستا، وهو يحاول طرح سؤاله الثاني على ترامب.
وانتشرت صور فيديو عن الحادثة فور وقوعها على الانترنت.

ما الذي قاله البيت الأبيض؟

كتبت ساندرز على تويتر "إن البيت الأبيض لن يتسامح مع صحفي يضع يده على امرأة وهي تحاول تأدية عملها".
وقالت إن "افتخار سي أن أن بتصرف مراسلها أمر مقرف ومثال على عدم احترام القناة لأي أحد"، مضيفة أنه "بسبب ما وقع اليوم، فإن البيت الأبيض يعلق اعتماد الصحفي المعني إلى أجل غير مسمى".
ونشرت المتحدثة باسم البيت الأبيض صورة مقربة للحادث، قائلة إنها "لن تتسامح مع التصرف غير اللائق الذي يظهر في الصورة".
وكتب أكوستا على موقع تويتر بأن الأمن منعه من دخول البيت الأبيض.

ما الذي حدث في المؤتمر الصحفي؟

الرئيس ترامب أهان أكوستا بعدما حاججه بشأن قافلة مهاجرين تتجه نحو الولايات المتحدة قادمة من أمريكا الوسطى.
وحاولت موظفة في البيت الأبيض نزع الميكروفون من يد الصحفي.
وقال ترامب للصحفي "يكفي، يكفي"، وأمره بالجلوس ووضع الميكروفون.
وأضاف الرئيس: "عار على ‘سي أن أن‘ أن تعمل أنت فيها"، "الطريقة التي تعامل بها سارة هاكابي (ساندرز) فظيعة".

كيف كانت ردود الفعل؟

انتقد الصحفيون قرار منع أكوستا من دخول البيت الأبيض.
أصدرت سي أن أن بيانا، نشرته على تويتر، يقول إن منع أكوستا كان "عقابا له على أسئلته المحرجة"، وإن "تبرير المتحدثة باسم البيت الأبيض، سارة ساندرز، كاذبة إذ وزعت تهما باطلة وذكرت حادثة وهمية".
وأضافت: "ندعو البيت الأبيض إلى التراجع فورا عن هذا القرار البائس و غير الصائب".

Thursday, September 27, 2018

आधार पर फ़ैसले के पीछे 92 साल का यह पूर्व जज

प्रीम कोर्ट ने आधार पर मंगलवार को जो फ़ैसला दिया, उसने आम लोगों से जुड़ी कई चीज़ों के लिए आधार की अनिवार्यता को ख़त्म कर दिया.
इस मामले में कई याचिकाकर्ता रहे, लेकिन पहले याचिकाकर्ता रहे जस्टिस केएस पुट्टास्वामी.
आने वाली पीढ़ियां आधार के मामले को क़ाग़ज़ों पर केएस पुट्टास्वामी बनाम भारतीय संघ के रूप में याद रखेंगी.
जस्टिस पुट्टास्वामी 92 वर्ष के हैं और हर सवाल का सावधानी से जवाब देते हैं.
टेलीविज़न पर उन्होंने फ़ैसले के जो हिस्से देखे-सुने हैं, उस आधार पर वह कहते हैं कि सुप्रीम कोर्ट का बहुमत फ़ैसला 'निष्पक्ष और जायज़' लगता है.
जस्टिस पुट्टास्वामी कर्नाटक हाईकोर्ट के पूर्व जज हैं और आंध्र प्रदेश के पिछड़ा वर्ग आयोग के सदस्य हैं.
वह आधार के साथ-साथ निजता के अधिकार मामले के भी पहले याचिकाकर्ता हैं. निजता के अधिकार मामले में शीर्ष अदालत ने निजता को मौलिक अधिकार माना था.
2012 में जब आधार मामले पर केंद्र सरकार के कार्यकारी आदेश के ख़िलाफ़ जनहित याचिका दाख़िल करने का फ़ैसला किया, तब उन्हें अंदाज़ा नहीं रहा होगा कि वह भारत के न्यायिक इतिहास के दो महत्वपूर्ण फ़ैसलों का हिस्सा बनेंगे.
बुधवार को जब आधार पर सुप्रीम कोर्ट का फ़ैसला आया तो रिपोर्टर जस्टिस पुट्टास्वामी की प्रतिक्रिया लेने पहुंच गए. जस्टिस पुट्टास्वामी अपनी चिर परिचित सादगी के साथ उनसे मिले.
कर्नाटक हाईकोर्ट में उनके साथ रहे जस्टिस रामा जोइस कहते हैं, "जस्टिस पुट्टास्वामी बेशक एक बहुत विनम्र इंसान है. वो हमेशा से ऐसे रहे हैं."
जस्टिस जोइस पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रहे हैं. वह बिहार और झारखंड के राज्यपाल और भाजपा से राज्यसभा सदस्य भी रहे हैं.
जस्टिस पुट्टास्वामी ने सरकारी आदेश की चर्चा सबसे पहले जस्टिस जोइस से की थी और उसी के बाद जनहित याचिका दाख़िल करने का फैसला किया था.
उनके बेटे बीपी श्रीनिवास के मुताबिक, " 2010 में उनके कुछ दोस्त दिल्ली से आए थे और चाय पर उनसे बातचीत चल रही थी. तभी इस बारे में बातचीत हुई कि सरकार एक एग्ज़ीक्यूटिव आदेश जारी करके नागरिकों के फिंगर प्रिंट नहीं ले सकती."
जस्टिस जोइस ने बताया, "उन्होंने चर्चा की कि किन आधारों पर जनहित याचिका दाख़िल की जा सकती है. उन्होंने बस याचिका दाख़िल कर दी लेकिन जिरह के लिए कभी अदालत नहीं गए. दूसरे वक़ीलों ने जिरह की."
इन वकीलों में सबसे पहले थे सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील गोपाल सुब्रमण्यन.
जस्टिस पुट्टास्वामी ने बीबीसी हिंदी से कहा, "जब मैंने याचिका डाली तब वह एक एग्ज़ीक्यूटिव आदेश था. आधार एक्ट उसके बाद आया. और अब कोर्ट ने इस एक्ट के दो सेक्शन हटा दिए हैं जो संविधान के अनुच्छेद 19 के ख़िलाफ़ थे."
"मेरा मत ये है कि आधार एक्ट अपराधियों की धर-पकड़ के लिए तो ठीक है, लेकिन मेरे और आपके जैसे आम नागरिकों के लिए यह उपयोगी नहीं है."
इस फैसले पर विस्तार से राय मांगे जाने पर उन्होंने कहा, "मैं बिना पूरा फ़ैसला पढ़े अपनी राय नहीं बना सकता."
एक टूटी हुई नाव में अनजान समंदर के बीचों-बीच 49 दिनों तक रहना. वो भी बिना खाना और पानी के. क्या ये आपको 'लाइफ़ ऑफ़ पाई' या किसी ऐसी ही फ़िल्म की याद दिलाता है?
ये किसी फ़िल्म की नहीं बल्कि असली कहानी है.
18 साल के आल्दी नोवेल आदिलांग जुलाई महीने में इंडोनेशियाई समुद्र तट से तक़रीबन 125 किलोमीटर की दूरी पर एक 'फ़िशिंग हट' यानी मछली पकड़ने के लिए बनी झोपड़ीनुमा नाव में थे. इसी समय अचानक तेज़ हवाएं चलने लगीं और नाव का लंगर टूट गया.तीजा, आल्दी की फ़िशिंग हट बेकाबू हो गई और हज़ारों किलोमीटर दूर गुआम के पास जाकर रुकी. हालात ऐसे थे कि आल्दी का ज़िंदा बचना मुश्किल था लेकिन ख़ुशकिस्मती से पनामा के एक जहाज़ ने उन्हें 49 दिनों बाद सुरक्षित बचा लिया.
इंडोनेशियाई के सुलावेसी द्वीप समूह के रहने वाले आल्दी एक 'रोम्पॉन्ग' पर काम करते थे. रोम्पॉन्ग मछली पकड़ने वाली एक नाव होती है जो बिना किसी पैडल या इंजन के चलती है.
इंडोनेशिया के 'जकार्ता पोस्ट' अख़बार में छपी रिपोर्ट के मुताबिक़, आल्दी का काम नाव पर उस ख़ास लैंपों को जलाना और उनकी देखरेख करना था जिसकी वजह से मछलियां नाव की तरफ़ आकर्षित होती हैं.
मछली पकड़ने के लिए बनाए इस झोपड़ीनुमा नाव को समंदर में रस्सियों के सहारे चलाया जाता है. जुलाई को जब तेज़ हवाओं की वजह से आल्दी की नाव बेकाबू हुई, उनके पास बहुत कम खाना बचा था. ऐसी स्थिति में उन्होंने हिम्मत और सूझबूझ से काम लिया. आल्दी ने मछलियां पकड़ीं और नाव पर बने लकड़ियों के बाड़ जलाकर उन्हें पकाया.
अभी ये पता नहीं चला है कि आल्दी ने पानी का इंतज़ाम कहां से किया.
जापान में मौजूद इंडोनेशिया के राजनायिक फजर फ़िरदौस ने 'द जकार्ता पोस्ट' को दिए इंटरव्यू में बताया कि इन 49 दिनों में आल्दी बुरी तरह डरे रहते थे और वो अक्सर रोया करते थे.
फजर फ़िरदौस के मुताबिक़, "आल्दी को जब भी कोई बड़ा जहाज़ दिखता, उनके मन में एक उम्मीद जग जाती. 10 से ज़्यादा जहाज़ उनके रास्ते से गुज़रे लेकिन न तो किसी की नज़र उन पर पड़ी और न ही कोई जहाज़ रुका."
आल्दी की मां ने समाचार एजेंसी एएफ़पी को बताया कि उन्हें अपने बेटे के ग़ायब होने का पता कैसे चला.
उन्होंने कहा, "आल्दी के बॉस ने मेरे पति को बताया कि वो लापता हो गया है. इसके बाद हमने सब कुछ भगवान पर छोड़ दिया और उसकी सलामती के लिए लगातार दुआएं मांगते रहे." गस्त को आल्दी ने अपने पास एक पनामा का एक जहाज़ देखा और आपातकालीन रेडियो सिग्नल भेजा.
इसके बाद जहाज़ के कैप्टन ने गुआम के कोस्टगार्ड से संपर्क किया. कोस्टगार्ड ने जहाज़ के क्रू को निर्देश दिया कि वो आल्दी के अपने गंतव्य तक यानी जापान लेकर जाएं.
आल्दी 6 सितंबर को जापान पहुंचे और दो दिन बाद उन्होंने इंडोनेशिया के लिए उड़ान भरी. इसके बाद आख़िरकार वो अपने परिवार से मिला. बताया जा रहा है उनकी सेहत अच्छी है.
आल्दी की मां ने कहा, "अब वो वापस आ गया है. 30 सितंबर को उसका जन्मदिन है, वो 19 साल का हो जाएगा. हम जश्न की तैयारी में हैं."

Monday, September 17, 2018

回应反驳:华北的水桶究竟有多满?

我在最近一篇文章和同时发布的报告中提出了 一个观点,那就是除非立即做出突破性的变革,否则华北将面临一场水危机。

对此,罗•美沙、江旻、史晨辰和张文静在他们合著的文章中是这么回应的:“中国的经济发展目前没有受到水资源供应短缺的威胁,且在不久的将来也不太可能受到威胁。”

鉴于目前全球经济相互依存,我也希望这一论断是正确的,这对中国和世界其他国家都好。不幸的是他们提出的论据还不够有说服力,不足以让我收回之前的话。

我们当然有一些共识,但我主要不赞同的是该文章未能充分考虑到中国决策背后的政治因素和实际工作开展的方式。

该文章的论点总结起来如下,“总体来说华北需要的不是更多水,而是需要更好地管理其所拥有的水资源”。我认为文中给出的证据恰好反驳了前半句的论点,而后半句虽不言而喻,但不能用于证明前半句话。”

“不加甄别地”应用法尔肯马克指数

诚然,法尔肯马克指数(  )只能粗略评估水资源是否短缺。我们得透过现象看本质,否则很难解释以色列如何能靠人均91立方米(基于世界银行的数据)的水资源量发展起来,或者为什么美国人均水资源占有量8846立方米,而加利福尼亚州却面临着严重的旱灾。

但如果我们评价华北水资源情况时,只是说“华北的数值肯定低于西欧和北美”,就有一点不够坦诚了。这种说法完全掩盖了两边差异的尺度。京津冀地区的人口约为英国、法国或意大利的两倍,但水资源分别仅为英国的10%,以及法国和意大利的7%左右。

其次,官方的统计数字需要进一步核实。虽然水资源数据造假的动机较小,但我们不应该低估准确收集数据,尤其是地下水和人口相关数据的难度。

即便如此,“官方数据显示,北京的地下水水位自2010年起一直保持稳定,并在2015和2016年略有上升”这样的说法也与北京市水务局的说法截然相反,该局称地下水水位下降的速度正在放缓,且到2025年才会开始回升。文章将这一变化归功于南水北调工程。今年记录周期内北京地区没有降雨,这将不利于地下水位的回升。

北京和雄安新区不能代表华北

文章强调,如果水危机迫在眉睫,北京和雄安新区就不会大肆消耗水资源。我很羡慕这种乐观,但认为北京的官员会考虑到北方所有12个缺水省份的水资源状况,这种想法未免太过理想主义。

北京是首都,雄安新区是习近平主席的标志性项目且已写入宪法。所以这两个地方的用水需求都会优先满足,尤其是通过南水北调工程(见下表,京津冀地区水资源数量增多与南水北调工程的投运在时间上是相吻合的)。我听到的对雄安新区的不同意见,主要来源于对缺水和过度污染的担忧。

密云水库是亚洲最大的人工湖,也是北京最大的地表水源地。图片来源:keso s
我在最近一篇文章和同时发布的报告中提出了 一个观点,那就是除非立即做出突破性的变革,否则华北将面临一场水危机。

对此,罗•美沙、江旻、史晨辰和张文静在他们合著的文章中是这么回应的:“中国的经济发展目前没有受到水资源供应短缺的威胁,且在不久的将来也不太可能受到威胁。”

鉴于目前全球经济相互依存,我也希望这一论断是正确的,这对中国和世界其他国家都好。不幸的是他们提出的论据还不够有说服力,不足以让我收回之前的话。

我们当然有一些共识,但我主要不赞同的是该文章未能充分考虑到中国决策背后的政治因素和实际工作开展的方式。

该文章的论点总结起来如下,“总体来说华北需要的不是更多水,而是需要更好地管理其所拥有的水资源”。我认为文中给出的证据恰好反驳了前半句的论点,而后半句虽不言而喻,但不能用于证明前半句话。”

“不加甄别地”应用法尔肯马克指数

诚然,法尔肯马克指数(  )只能粗略评估水资源是否短缺。我们得透过现象看本质,否则很难解释以色列如何能靠人均91立方米(基于世界银行的数据)的水资源量发展起来,或者为什么美国人均水资源占有量8846立方米,而加利福尼亚州却面临着严重的旱灾。

但如果我们评价华北水资源情况时,只是说“华北的数值肯定低于西欧和北美”,就有一点不够坦诚了。这种说法完全掩盖了两边差异的尺度。京津冀地区的人口约为英国、法国或意大利的两倍,但水资源分别仅为英国的10%,以及法国和意大利的7%左右。

其次,官方的统计数字需要进一步核实。虽然水资源数据造假的动机较小,但我们不应该低估准确收集数据,尤其是地下水和人口相关数据的难度。

即便如此,“官方数据显示,北京的地下水水位自2010年起一直保持稳定,并在2015和2016年略有上升”这样的说法也与北京市水务局的说法截然相反,该局称地下水水位下降的速度正在放缓,且到2025年才会开始回升。文章将这一变化归功于南水北调工程。今年记录周期内北京地区没有降雨,这将不利于地下水位的回升。

北京和雄安新区不能代表华北

文章强调,如果水危机迫在眉睫,北京和雄安新区就不会大肆消耗水资源。我很羡慕这种乐观,但认为北京的官员会考虑到北方所有12个缺水省份的水资源状况,这种想法未免太过理想主义。

北京是首都,雄安新区是习近平主席的标志性项目且已写入宪法。所以这两个地方的用水需求都会优先满足,尤其是通过南水北调工程(见下表,京津冀地区水资源数量增多与南水北调工程的投运在时间上是相吻合的)。我听到的对雄安新区的不同意见,主要来源于对缺水和过度污染的担忧。

中国12个最干旱省份的人均水资源量(单位:立方米)

数据来源:中国统计年鉴2011-2017

遗憾的是,北京在公园绿地和环境流量方面的用水量超过10亿立方米这件事并不让我感到惊讶。这种用途的水往往因为污染太过严重,无法作为农业、工业或者生活用水。

罗美沙文章过分聚焦北京,这座城市确实在回收利用方面做出了值得称道的努力,但不能代表其他省份。李克强总理曾承诺2018年投资1万亿元用于水利建设,其中多数用于调水和污染控制,前者不会增加整体供应,后者带来的影响也有限。要大幅提升京津地区以外城市的水资源回收率,还需采取更多行动。

饮用水只是小问题

文章多次以饮用水供应增加为证据,证明不存在水危机。政府改善水质的努力令人钦佩,但无论水质如何改善,如果总量太少,那么问题就仍然存在。

无论如何,居民用水只占总数的14%。北京居民的用水量或许比墨尔本低50%到70%,但和农业用水(约占62%)以及工业/发电用水(占22%)相比,这点节约根本算不上什么。农业和工业用水需求才是导致黄河断流、2.8万条河流消失的主要原因。与此同时,城市化和生活水平的不断提高可能会缩小中国和澳大利亚居民之间的用水差距。

水污染治理不是万灵药

中国政府在治理污染方面的努力确实应该赞扬,但不能说“中国的水资源问题很大程度上是由广泛的水污染造成的”。水污染确实难辞其咎,但因污染而无法使用的水仅占受调查水资源总量的8.3%。这些水能不能用其实影响有限,因为用水需求是随着人口和经济愿景的增长而增长的。

减少这8.3%不可用的水不仅困难而且成本高昂,尤其因为大部分土壤也被污染了,进而会使经过土壤层渗入地下的水也受到污染。我不认为“我们有理由对中国解决水污染问题持乐观态度”。《2017年国民经济和社会发展规划报告》中没有达到的3项目标都和环境有关,其中一项就是水污染目标。

至于国务院2015年发布的《水污染防治行动计划》,和大多数类似的计划一样,只是一份表达愿望的申明,大部分还要看未来如何实施、规范和执行。河长制或许有所帮助,但官员最后的升迁和惩罚依旧是不仅看表现,还要看人脉。

调水并非解决之道

文章称“随着一张几乎覆盖全国的水网铺陈开来,水供应将不会成为制约中国发展的主要因素”。我和其他很多人一样,对南水北调工程和其他小规模项目不抱乐观态度。

以下是研究南水北调工程的一组澳大利亚学者在2015年撰写的论文中的观点:“南水北调工程现有路线沿线的调水量必须减少,项目的扩建必须搁置…随着其局限性的日益明显,南水北调工程很可能成为中国利用大工程解决水问题的坏例子。”

我同意这一观点。很巧的是,上述两种观点都出自墨尔本大学的同一个团队。而如今,该团队正试图让我相信,南水北调工程和优化水网意味着水资源短缺不再是问题。鉴于他们的论文讨论了水资源相关的保密性和获取信息的难度,那么是什么让他们在2015年论文发表以后的30个月里改变了观点是一件很有意思的事。

“几乎覆盖全国的水网”这一说法不能令人信服。地形、花费和时间都不能改变中国80%以上的水资源都集中在南方且无法调往北方的事实。

更好地管理水资源是关键

我们在这方面的意见是一致的,尤其是需要解决需求而不是供应方面的问题。然而,虽然出于政治稳定性方面的考虑,不大幅提高水价是可以理解的,但从长远来看这么做无疑加剧了水资源短缺的问题。

关于文章作者采访的15家公司中只有一家提到了对用水的限制(类似滑雪胜地和高尔夫球场这样的特殊行业的发展本来就匪夷所思),这一点并不让我感到惊讶、宽慰或者安心。这些公司不认为水资源是问题,是因为相比其他水资源充沛的国家,中国的水价要低很多。

关于合同节水措施和新近出现的水权交易,我也存在疑问。这些合理的措施仍处于萌芽阶段,就算真的有用,也需要再发展很长一段时间。碳交易市场的经验并不令人鼓舞。

是否应该谈论这场迫在眉睫的危机?

我认为应该。虽然在北方一些省份,水资源短缺已经影响到了民众的生活和生计,但我们不知道大规模的危机具体什么时候会来。更好的管理措施,包括我在报告中列出的那些措施或许能预防危机。但越是拖延,发生水资源危机的可能就越大。

我也希望自己错了,因为危机对大家都不好。但证据说明我或许没错,这几位作者撰写的这篇反驳我的文章自然也丝毫不能改变我的观点。

Thursday, August 30, 2018

भीमा कोरेगांव: क्या है नज़रबंदी, ट्रांज़िट रिमांड...जैसे शब्दों का मतलब

पुणे पुलिस ने मंगलवार को पांच बुद्धिजीवियों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं को देश के अलग-अलग हिस्सों से गिरफ़्तार किया.
ये हैं वामपंथी विचारक और कवि वरवर राव, वकील सुधा भारद्वाज, मानवाधिकार कार्यकर्ता अरुण फ़रेरा, गौतम नवलखा और वरनॉन गोंज़ाल्विस.
गिरफ़्तार किए गए सभी लोग मानवाधिकार और अन्य मुद्दों को लेकर सरकार के आलोचक रहे हैं. उन पर आरोप है कि वे भीमा कोरोगांव हिंसा को भड़काने में शामिल थे.
सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई में गिरफ़्तार लोगों को छह सितंबर तक हाउस अरेस्ट यानी नज़रबंद रखने के लिए आदेश दिए हैं.
पिछले साल 31 दिसंबर को दलितों ने एक बड़ी रैली का आयोजन किया था, जो बाद में झड़प में बदल गई जिसमें एक व्यक्ति की मौत हो गई थी.
भारतीय क़ानून में हाउस अरेस्ट का ज़िक्र नहीं है. इसका मतलब सिर्फ़ इतना होता है कि गिरफ़्तार किया गया व्यक्ति अपने घर से बाहर न निकल पाए. इसमें व्यक्ति को थाने या फिर जेल नहीं ले जाया जाता है.
हाउस अरेस्ट के दौरान गिरफ़्तार व्यक्ति किस से बात करे, किससे नहीं, इस पर पांबदी लगाई जा सकती है. उन्हें सिर्फ़ घर के लोगों और अपने वकील से बातचीत की इजाज़त दी जा सकती है.
आगे कोई अपराध न हो और सबूतों या फिर गवाहों को अभियुक्त प्रभावित न कर सके, उस स्थिति में हाउस अरेस्ट को सही माना जाता है.
सर्च वॉरंट वो क़ानूनी अधिकार है जिसके तहत पुलिस या फिर जांच एजेंसी को घर, मकान, बिल्डिंग या फिर व्यक्ति की तलाशी के आदेश दिए जाते हैं.
पुलिस इसके लिए मजिस्ट्रेट या फिर ज़िला कोर्ट से इजाज़त मांगती है. अपराध के सबूतों का पता लगाने के लिए कोर्ट से इसकी इजाज़त मांगी जाती है.
अपराधिक प्रक्रिया संहिता 1973 की धारा 91, 92 और 93 के तहत जांच एजेंसी इसकी इजाज़त मांगती है.
अगर पुलिस अपने क्षेत्र से बाहर सर्च वॉरंट चाहती है तो उसे स्थानीय कोर्ट से संपर्क करना होता है. इजाज़त मिलने के बाद उसे स्थानीय पुलिस को भी जांच में शामिल करना होता है. स्थानीय पुलिस थाने में इसका लिखित ज़िक्र किया जाता है.
जघन्य अपराध के मामले में पुलिस बिना सर्च वॉरंट के तलाशी ले सकती है. अगर अभियुक्त को गिरफ़्तार करने की ज़रूरत होती है तो पुलिस को तलाशी का अधिकार होता है.
अगर किसी बिल्डिंग में सिर्फ़ औरतें रहती हैं तो तलाशी सूरज डूबने के बाद और सूर्योदय के पहले नहीं ली जा सकती है.
किसी अभियुक्त को गिरफ़्तार करने के लिए कोर्ट अरेस्ट वॉरंट जारी करता है. अरेस्ट वॉरंट के तहत संपत्ति की तलाशी ली जा सकती है और उसे ज़ब्त भी किया जा सकता है.
अपराध किस तरह का है, उसके आधार पर यह ज़मानती और गैर-ज़मानती हो सकता है. अगर गिरफ़्तारी पुलिस को अपने निर्धारित क्षेत्र से बाहर करनी होती है तो उसे स्थानीय पुलिस का सहयोग लेना ज़रूरी है. इसके बारे में स्थानीय पुलिस थाने में लिखित ज़िक्र किया जाता है.
संज्ञेय अपराध के मामले में पुलिस अभियुक्त को बिना अरेस्ट वॉरंट के गिरफ़्तार कर सकती है. पुलिस को गिरफ़्तार व्यक्ति को 24 घंटे के अंदर कोर्ट में प्रस्तुत करना होता है.
धारा 41 के तहत पुलिस को गिरफ़्तार व्यक्ति को ज़मानत की प्रक्रिया बतानी होती है. उसे इससे संबंधित दूसरी जानकारी भी देनी होती है.
सीआरपीसी की धारा 41 के अनुसार पुलिस किसी को गिरफ़्तार तभी कर सकती है जब उसके ख़िलाफ़ कोई शिकायत दर्ज की गई हो, या फिर कोई पुख़्ता सूचना मिली हो. गिरफ़्तारी उस शिकायत के तहत की जा सकती है जिसके सिद्ध होने पर सात साल से ज़्यादा की सज़ा हो.
गिरफ़्तारी उस स्थिति में की जाती है जिसमें यह आशंका होती है कि अभियुक्त आगे अपराध को अंजाम दे सकता है या फिर सबूतों या जांच को प्रभावित कर सकता है.
इस क़ानून के तहत पुलिस को गिरफ़्तार किए गए व्यक्ति को गिरफ़्तारी के संबंध में बताना होता है. 41D गिरफ़्तार किए गए व्यक्ति को यह अधिकार देता है कि पुलिसिया पूछताछ के दौरान वो अपने वकील से संपर्क साध सके.
गिरफ़्तारी के 24 घंटे के अंदर अभियुक्त को संबंधित कोर्ट में पेश करना होता है. अगर गिरफ़्तारी क्षेत्र से बाहर हुई हो या फिर कोर्ट में प्रस्तुत करने में वक़्त ज़्यादा लग सकत है तो स्थानीय कोर्ट में ट्रांज़िट रिमांड के लिए पेशी की जाती है.
सीआरपीसी की धारा 76 के मुताबिक यह ज़रूरी होता है. मजिस्ट्रेट कोर्ट से ट्रांज़िट रिमांड मिलने के बाद ही पुलिस गिरफ़्तार व्यक्ति को अपने क्षेत्र में ले जा सकती है.

Sunday, August 26, 2018

中国发现首例寨卡病毒感染病例

据新华社2月9日报道,中国确诊第一例寨卡病毒感染病例,感染者发病前曾前往委内瑞拉旅游。

该患者为男性,34岁,江西省赣州市赣县人,旅游归国后出现发热、头疼、晕眩的症状。


寨卡病毒以蚊虫为传播媒介,经确定该病毒是导致南美多例小头畸形症(大脑先天发育不良)的元凶之后,引起各国警惕。

针对这一情况,世界卫生组织紧急呼吁研发疫苗,找出更好的诊疗方法,同时要求全球各国提高警惕。

中国的这位患者在经停香港和深圳后于2月5日返回赣县。

中国国家卫生和计划生育委员会( )证实,该患者目前病情稳定,体温已经恢复正常,正在赣县当地医院接受隔离治疗。

中国卫生委淡化了感染进一步爆发的风险,认为“由于气温低”,该输入性感染病例引发病毒大范围传播的可能性也“非常低”。

报告说,香港当局的对策是加强机场检查工作,同时加强了对边检人员的培训。

世卫组织估计,未来12个月,美洲的寨卡病毒感染病例将会高达400万例。其中80%的人感染病毒后不会出现明显症状,一旦发病,就会伴有发热、红疹和结膜炎。

过去6周,英国确诊4例寨卡病毒感染病例。英国公共卫生署向议会委员会汇报称,这4例感染病例都是“旅游造成的输入性病例”,传染源并不在英国本土。


据当地媒体周五报道,意大利境内已经确诊9例寨卡病例,其中4例位于北部的威尼托地区。

单击此处前往中拉对话,查看气候变化以及寨卡病毒完整报告。

单击此处查看寨卡恐慌可能会毁了里约热内卢奥运会相关报道。

Wednesday, August 15, 2018

大幅削减产出可能使化石燃料生产者"有更大利润可图"

近日,欧盟发布了2021到2030年年度温室气体减排目标提案,覆盖交通、建筑、农业、废物处理、土地利用和林业等多个领域。

欧盟温室气体排放总量中约有45%来自于发电和工业部门。这部分排放已经纳入了欧盟排放权交易系统( ),并且该系统目前正根据2030年目标进行升级。 新的
提案涵盖了经济领域的其他部门,并计划在2030年之前将欧盟温室气体排放总量在1990年的基础上降低40%。

这份新提议中涉及的目标以及实现机制充分汲取了《京都议定书》以及欧盟排放权交易系统的经验,但是其中一些内容在欧盟成员国家和相关环境组织中引起了轩然大波。

欧盟各国首脑已就2014年整体气候目标达成一致。而在过去18个月里,欧盟委员会(欧盟的执行机构)就如何在欧盟内落实非排放权交易系统减排任务分担,与各成员国进行了广泛协商。

如今,这份所谓的
《减排责任共担规定》已经初步成型。观察人士认为,在最终目标达成之前,各方应该还要经历一番长久的讨价还价。然而我们依旧可以看出,文件草案已经对某些致力于加快接受减排任务的国家给予了适当的让步优惠。

欧盟委员会提议各国采用独立的减排目标,比如瑞典的目标是在2005年的基础上减少40%的排放,因为目前该国可再生能源发展顺利,而且碳减排意愿强烈;而保加利亚的减排总量则为零,因为该国目前还在努力实现基础设施更新换代,以便尽早降低对俄罗斯天然气进口的依赖。

相比于之前的2013-2020年减排目标,本次提案相对更加复杂,因为欧盟需要根据各成员国经济实力和日益增长的减排意愿,综合平衡各方减排任务分配。

各个国家
目标的制定主要依据的是各国的人均国内生产总值。德国、法国和英国这样的发达经济体自然要承担不少重任,但波兰已经对完成任务的难度表示了不满。

波兰环境部的一份声明指出,7%的减排目标“很难实现”,因为波兰根本无力承担这样的任务。

为此,欧盟委员会也特意出台了一些通融机制,让这些最富裕的国家在实现目标的过程中也能获得一些灵活性。

首先,提案第一次将土地利用方式纳入其中。每个国家都会根据植被碳汇得到一个减排配额,这样如果有政府认为提案涉及的减排任务难以实现,欧盟委员会还会依据碳汇给予适当的目标份额减免。

其次,各国温室气体减排速度如果比提案要求的更快,就可以将未使用的配额“存”起来留到以后使用。同样,如果减排速度低于年度目标要求,各国也可以提前“预支”配额,上限为其年减排目标的5%。

提案中的这种排放量储存和出借机制,实际上是仿效了《京都议定书》框架下的国家级碳排放交易机制以及欧盟排放权交易系统。

然而,与这种机制配套的政策就不那么妙了:提案同时也规定,所有在2013年到2020年期间积累的排放额度盈余都会被一笔勾销。汤森路透碳点公司预计其涉及总额度可能高达15亿吨,而且将对意大利、法国和西班牙造成重大影响。

第三个新突破就是在所谓的“非贸易”领域和欧盟排放权交易系统之间建立了联系。依据本次欧盟提案,包括瑞典、荷兰和爱尔兰在内的9个欧盟国家都将有机会用其在欧盟碳排放交易排放机制中的配额,来等量抵消其非欧盟排放权交易系统领域的排放量,抵消总量不超过一亿吨。

欧盟委员会表示,这9个国家目前承担了很大一部分的减排份额,因此,通过欧盟减排配额来抵消部分“非交易系统领域”的减排量为这些国家提供了更多的运作灵活性,同时方便减少市场中的配额盈余(据悉目前这一数字可能高达20亿吨)。

这些灵活机制的最终目的其实就是减轻某些国家的负担。

不过也有环境组织指出,本次的《减排责任共担指导意见》可能与欧盟在巴黎气候协议中的说法相左。欧盟2030年之前在2005年的基础上减排40%的目标单独听起来的确很有魄力,但是在巴黎协议中提到的2050年减排目标更有雄心,后者减排总量可是高达90%到95%。


环境组织Sandbag认为,欧盟完全可以实现50%的减排目标,而提案中所谓的“灵活机制”却可能导致某些国家根本不需要进行减排。

Sandbag的菲尔·麦克唐纳(Phil MacDonald)表示:“总的来看,这些灵活机制可能会在整体减排预算中增加4.2亿吨的二氧化碳排放量。也就是说,欧洲整体根本不需要进行减排。其中,新成员国机制漏洞将增加3900万吨,排放权交易系统将增加1亿吨,而[土地利用模式]则会增加2.8亿吨。”

而且该提案还明确将英国包括其中,并为英国设定了2间减排37%的目标。英国很有可能于2017年就脱欧问题展开谈判,这就意味着欧盟委员会必须
据此重新计算总体减排目标。

欧盟将陷入了两难境地:英国一向都是推动气候环保运动的积极分子,且先后发布了一系列颇有魄力的目标。而英国脱欧事实已定,那么英国的这些减排重担又该如何分配到各个国家呢?

目前来看,欧盟只能根据现有各国能力,将英国的减排任务分配给各成员国,同时增加相应的灵活机制,帮助那些相对困难的经济体更好地实现减排目标。

要想成功应对英国脱欧和欧盟成员国谈判的巨大压力,欧盟委员会就需要在《减排责任共担规定》的协商过程中付出更多的努力。

Sunday, July 29, 2018

前联合国气候官员:只有去碳化才能保持竞争力

一年前,美国总统特朗普( )宣布将带领美国退出《巴黎气候协定》。而一年后的今天,全球应对气候变化的势头依旧强劲,联合国气候变化框架公约( )前秘书长克里斯蒂娜·菲格雷斯说道。

她告诉中外对话:“坦率地讲,从经济角度来说,我认为美国退出《巴黎气候协定》不会产生非常大的影响。因为无论从技术还是从财政的角度来看,去碳化已成定局。虽然进展可能不会太快,但的确已经是不可改变的了。这是一条不可逆转、势不可挡的路。”

近年来,中国已经越来越意识到采取强有力的气候行动所带来的好处。中国的国内政策,以及与其他国家建立的伙伴关系都清楚地表明了这一点。

菲格雷斯表示:“中美关系对达成《巴黎气候协定》至关重要。而如今协定已经成功缔结,我认为美中关系对中国来说在这一层面上的意义可能没那么大了。中国将从本国利益出发,继续坚持走自己的环保道路。

她表示,中国主要看重的是在公众健康效益和经济竞争力方面带来的好处。

菲格雷斯指出:“中国的空气污染‘举世闻名’。但民间的行动和由此引发的一场大气污染治理行运动显示出该议题在中国得到的重视。而更重要的是,政府也开始正视这个问题,并逐步关停城市中的燃煤电厂。”

“中国领导人已经明确表示,要带领世界朝着‘生态文明’的方向前进。要想实现这个目标,就必须实现经济和金融结构的绿色转型。”

“中国想成为全球太阳能技术的领导者,不仅是国内安装量第一,在产品和技术出口方面也要拔得头筹。电池产业也是如此。目前,中国已经投资了5到7家超大型电池厂,因为中国意识到这将是一个规模巨大的市场。” 菲格雷斯说道。

但是,中国想要在未来几十年限制和削减排放仍然是一个前所未有的挑战。一份研究显示,由于经济增长强劲,预计今年中国的排放量将出现增长。

由于特朗普政府采取气候变化行动前景渺茫,菲格雷斯将希望寄托在了企业、城市和州层面的非国家行为主体上。

菲格雷斯表示:“如今人们将大量的注意力都转移到了城市、省和州上,原因有几个。首先,全球气候变化行动国家层面上所需要做的工作基本上已经包括在《巴黎气候协定》中。”

“这是一个只有国家政府之间通过谈判才能达成的法律框架,地方政府不能。如今,已经进入到了落实和深入探讨阶段,这就需要各级政府、公共部门和私有企业的密切参与。”

“所以,这是政策贯彻到地方的一个自然而然的过程,日常决策是在地方政府层面上作出的。毫无疑问,这才是现在对话的重点,也就是我们支持9月召开的全球气候行动峰会(Global Climate Action Summit)的主要原因。”

“为了让各国政府获得必要的信心,能够在明年重回联合国谈判桌,也为了能够提高他们的承诺(也就是《巴黎气候协定》对这些国家的要求);他们必须每隔4年就进行一次谈判,而下一次谈判是在2020年。在明年进行《巴黎气候协定》工作回顾之前,他们需要最终确定兑现自己承诺的具体程序。”